लग्जरी SUV की दुनिया अब केवल रॉयल लुक और दमदार इंजन तक ही सीमित नहीं रह गई है, अब लोग केवल ब्रैंड वैल्यू देखकर गाड़ी नहीं खरीदते। आज का खरीदार जब गाड़ी खरीदने जाता है तब वह पावर माइलेज और फ्यूचर रेडी कार खरीदना चाहता है। और, इसी बदलती हुई सोच को ध्यान में रखना BMW के लिए बहुत ज्यादा जरूरी था। जी हाँ, BMW अपनी Flagship Coupe SUV BMW X8 के लिए plug-in hybrid Powertrain पर दांव लगाने की तैयारी कर चुका है। मतलब अब BMW न केवल फ्यूल एफिशिएंसी देगी, बल्कि बिना परफॉर्मेंस के समझौता किये एक स्मार्ट सस्टेनेबल ड्राइविंग अप अनुभव भी देगी।
जहां एक ओर आज पेट्रोल और डीजल पर्यावरण के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। वही इलेक्ट्रिक गाड़ियां फिलहाल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की वजह से चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या BMW X8 का यह plug-in hybrid वेरिएंट SUV सेगमेंट में फ्यूल एफिशिएंसी का नया बेंचमार्क सेट कर पाएगा भी या नहीं? और आज हम आपको इसी का पूरा विवरण देने वाले हैं, ताकि आप समझ सके कि, क्या इसे खरीदना फायदे का सौदा होगा या पैसा फंसाने का एक और नया तरीका?
आइये सबसे पहले समझते हैं plug-in hybrid Powertrain क्या होता है?
Plug-in hybrid Powertrain मतलब गाड़ी में 2 पावर सोर्स होते हैं,
- इंटरनल कंबशन इंजन जो कि पेट्रोल या डीजल से चलता है
- दूसरा इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी
- BMW X8 के प्लग इन हाइब्रिड वेरिएंट में यह बैटरी से बाहर चार्ज भी की जा सकेगी और प्लग इन हाइब्रिड इसे इंटरनल कंबशन का दम भी देगा।
BMW X8 plug-in hybrid कैसे काम करेगा?
BMW X8 का PHEV Version 3 मोड में काम करेगा:
- Pure Electric Mode: इस मोड में x86 इलेक्ट्रिक मोटर से चलेगी, मतलब जीरो फ्यूल खपत और जीरो एमिशन। और, यह शहर में रोजमर्रा की ड्राइविंग के लिए परफेक्ट साबित होगी। उम्मीद की जा रही है कि X8 की इलेक्ट्रिक रेंज 50 से 80 किलोमीटर के आसपास होगी।
- Hybrid Mode: इस मोड में सिस्टम खुद तय करेगा कि कब इंजन चलाना है और कब इलेक्ट्रिक मोटर? मतलब यहां गाड़ी स्मार्ट वर्क करेगी, जिससे बेहतर माइलेज तो मिलेगा, ड्राइविंग स्मूथ रहेगी, परफॉर्मेंस और एफिशिएंसी का परफेक्ट बैलेंस बना रहेगा।
- Engine Mode: इस मोड में गाड़ी हाईवे या लंबी दूरी की ड्राइव में पेट्रोल इंजन को ऑन कर देगी, जिससे इलेक्ट्रिक मोटर को अतिरिक्त पावर मिलेगा। खासकर चढ़ाई वाले रास्तों पर इलेक्ट्रिक मोटर ज्यादा एफिशिएंसी नहीं दिखाती इसीलिए बीच-बीच में पेट्रोल के पावर की आवश्यकता पड़ती है।
BMW का यह X8 plug-in hybrid क्यों फायदेमंद सिद्ध होगा?
- यदि BMW X8 को रोजाना चार्ज किया जाएगा तो पेट्रोल की खपत ना के बराबर हो जाएगी
- यहां माइलेज के आंकड़े तो बेहतर होंगे ही, वही दावा किया जा रहा है कि इसके PHEV वर्जन का कंबाइंड माइलेज और भी ज्यादा होगा।
- सबसे खास बात इस गाड़ी में ब्रेक लगाने पर जो ऊर्जा बनेगी वह बैटरी में स्टोर की जाएगी, मतलब हर बार ब्रेक लगाने पर गाड़ी एनर्जी स्टोर करेगी और गाड़ी की एफिशिएंसी पहले से ज्यादा बढ़ेगी।
BMW X8: परफॉर्मेंस से कोई समझौता नहीं
- BMW X8 में परफॉर्मेंस से कोई समझौता नहीं किया जा रहा, BMW की पहचान ही ड्राइविंग प्लेजर है और plug-in hybrid X8 में इलेक्ट्रिक मोटर से इंस्टेंट टॉर्क मिलेगा
- इंजन और मोटर मिलकर बेहद पावरफुल आउटपुट देंगे
- और भारी SUV होने के बावजूद तेज एक्सीलरेशन भी मिलेगा जिससे BMW वाली स्पोर्टी फील भी बनी रहेगी।
BMW X8 : Petrol Diesel Vs Plug-In Hybrid
| Features | Petrol/Diesel X8 | Plug in hybrid X8 |
| Fuel cost | High | Very Low |
| Electric drive | No | Yes |
| Emission | Very High | Very Low |
| City Drive | Costly | Cost Effective |
| Future Plan | Limited | High |
Future Powertrains में BMW की रणनीति
BMW इस बार एकदम तय कर चुका है कि वह एक ही तकनीक पर निर्भर नहीं रहेगा। इस बार कंपनी पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ plug-in hybrid और पूरी तरह से इलेक्ट्रिक मॉडल लॉन्च करने वाली है। X8 जैसे फ्लैगशिप मॉडल में PHEV साफ तौर से दिखाता है कि इस बार BMW ने लग्जरी और सस्टेनेबिलिटी को साथ लेकर आगे बढ़ने का रास्ता निकाला है।
भारत में PHEV गेम चेंजर क्यों होगा?
- भारत में अभी भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर काफी सीमित है।
- लोग लंबी दूरी की ड्राइव करना पसंद करते हैं, और हर जगह चार्जिंग मिलना आसान नहीं।
- उसके अलावा फ्यूल की कीमतें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं।
- ऐसे में BMW X8 का plug-in hybrid Version EV का अनुभव देगा
- रेंज की चिंता खत्म करेगा
- और Luxury SUV को ज्यादा प्रैक्टिकल बनाएगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर BMW X8 का यह plug-in hybrid वेरिएंट सिर्फ एक नया इंजन ऑप्शन नहीं है, बल्कि BMW की ऐसी सोच है जो लग्जरी के साथ पावर प्ले पसंद करते हैं। मतलब पावर से समझौता बिल्कुल नहीं, लेकिन पर्यावरण के साथ खिलवाड़ भी नहीं करना चाहते और लॉन्ग टर्म में ज़ेब का भी ध्यान रखना चाहते हैं
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